Sunday, 5 June 2016

अनमोल हीरा
कोई न जानता था कि वह एक लुटेरा था. उसके विवाह को बीस वर्ष हो गए थे परंतु उसकी पत्नी भी आज तक इस सत्य को न जान पायी थी.
वह जब भी किसी को लूटता था तब सारा काम बहुत चालाकी के साथ करता था. सोच-समझ कर और एक योजना बना कर ही किसी को लूटने जाता था और पीछे कोई सुराग न छोड़ता था. पुलिस को कभी भी कोई भी ऐसा सुराग न मिला जो उसे कानून के शिकंजे में फंसा देता.
वह हमेशा उन अमीर लोगों को लूटता था जो अपनी सुरक्षा को लेकर लापरवाह होते थे. उसने करोड़ों रूपए की सम्पत्ति इकट्ठी कर ली थी; अब लूटपाट करने की कोई आवश्यकता न थी. परन्तु अपने को रोक पाना उसके लिए असम्भव सा हो गया था. भीतर एक उन्माद सा उठता था और वह किसी लूट की योजना में व्यस्त हो जाता था.
इस बार उसने राजवंश परिवार को निशाना बनाने का निश्चय किया था. मन ही मन उसने एक प्रण भी ले लिया था. उसने अपने-आप को वचन दिया था कि राजवंश परिवार को लूटने के बाद वह कभी कोई लूटपाट न करेगा; यह उसके जीवन की अंतिम लूट होगी.
वह पूरी छानबीन कर चुका था. राजवंश परिवार में पाँच सदस्य थे, राज राजवंश, उसकी बूढ़ी माँ, पत्नी और दो बेटियाँ. परिवार का सम्बंध किसी राज घराने से था और ऐसा समझा जाता था कि विरासत में राजवंश परिवार को बहुमूल्य हीरे और जवाहरात भी मिले थे. 
उसने राजवंश हाउस की कई दिनों तक निगरानी की. जब वह पूरी तरह आश्वस्त हो गया कि उस परिवार को लूटना बहुत सरल है तब वह उचित अवसर की प्रतीक्षा करने लगा.
जिस दिन राजवंश परिवार छुट्टियां मनाने विदेश गया उसी रात उसने उन्हें लूटने की बात सोची. रात लगभग दो बजे वह घर के भीतर घुसा. चौकीदार ऊंघ रहा था. उसे उसने बेहोशी की दवा सुंघा दी. दो कुत्ते थे, उन्हें भी दवा मिला मांस खिला दिया. भीतर सभी नौकर गहरी नींद में थे.
तिजौरी राजवंश की माँ के कमरे में थी. वह जाग रही थी पर बीमार थी. उसने बुढ़िया की रत्तीभर भी परवाह न की और अपने काम में जुट गया. तिजौरी खोलने में वह खूब माहिर था. तिजौरी आसानी से खुल गई. तिजौरी में रखे हीरे, जवाहरात देख कर वह दंग रह गया.
‘नीले हीरे को हाथ भी न लगाना. वह एक स्टील के डिब्बे में है. बहुत ही अशुभ वह हीरा, तुम ने अगर उसे छू भी लिया तो जीवन पर पछताओगे.’ वह चौंक गया. यह बात राज राजवंश की माँ ने कही थी, आश्चर्य की बात यह थी कि उसकी आवाज़ बहुत ही कठोर और तीख़ी थी.
उसने कोई उत्तर न दिया. एक उत्सुकता उसके मन में जागी. वह झटपट स्टील के डिब्बे को ढूँढने लगा. डिब्बा मिलते ही उसने उसे खोला. भीतर एक अनमोल हीरा था, इतना बड़ा हीरा उसने आज तक न देखा था. हीरा हाथ में लेकर परखने लगा. हीरों की उसे अच्छी परख थी. यह एक अनोखा, अमूल्य हीरा था.
हीरे को अपनी जेब में रखते हुए उसने कहा, ‘अम्मा, आपने मुझे बहकाने का अच्छा प्रयास किया. पर मैं आपका धन्यवाद करता हूँ, आप न बताती तो शायद मुझे इसका पता ही न चलता, शायद मैं इसे ढूंढॅ ही न पाता.’
उसने तिजौरी में रखे बाकी सामान को वहीं छोड़ दिया. वह जानता था कि जो हीरा उसकी जेब में था वह अन्य सभी हीरे-जवाहरातों से अधिक मूल्यवान था.
तिजौरी बंद कर वह चल दिया. दरवाज़े के निकट पहुँच वह ठिठक कर रुक गया. अचानक एक अनजाना भय उसे डराने लगा. वह लौट कर भीतर आ गया. उसने बूढ़ी औरत की ओर देखा. वह एकटक घूर कर उसे देख रही थी.
‘तुम डर रहे हो? तुम्हें भय है कि मैं तुम्हें पहचान सकती हूँ? पुलिस को तुम्हारा हुलिया बता सकती हूँ?’ इतना कह वह जोर से हंसीं. उसकी हंसीं ने उसे डरा दिया.
अनचाहे उसके हाथ उठे और उसने उस औरत का गला दबा दिया. वह छटपटाती रही पर उसने तब तक उसका गला दबाये रखा जब तक कि उसकी मृत्यु न हो गयी.
घर लौट कर ही उसे अहसास हुआ कि वह बहुत बड़ी भूल कर बैठा था. उसने सैंकड़ों बार लूटपाट की थी पर आज तक कभी किसी को घायल न किया था. हिंसा से उसे सख्त घृणा थी. उसने तो कभी किसी को खरोंच तक न मारी थी. आज वह एक हत्या कर बैठा था, वह भी एक असहाय, बूढ़ी औरत की. वह जानता था कि ऐसा जघन्य अपराध करने की कोई आवश्यकता ही नहीं थी.   
अब अपने को कोसने के अतिरिक्त वह कुछ न कर सकता था. अपने कपड़े बदले बिना ही वह बिस्तर पर निढाल सा गिर गया.
अगली सुबह वह बहुत देर तक सोया रहा. पत्नी ने उसे जगाने का प्रयास किया पर वह उठ ही न पाया.
दुपहर बाद ही वह उठा. पत्नी उसके लिए कॉफ़ी लेकर आई और बड़ी उतेजना से बोली, ‘कल रात राजवंश हाउस में चोरी हुई. सभी न्यूज़ चैनलों पर यह समाचार छाया हुआ है. चोर क्या कुछ ले गए यह अभी पता नहीं चला, तिजौरी खाली मिली. चोर राजवंश की माँ की हत्या भी कर गए. बेचारी बीमार थी, अपाहिज थी, अंधी थी, बिल्कुल देख नहीं सकती थी. पर आश्चर्य की बात यह है कि उसकी मुट्ठी में एक अनमोल हीरा था, नीले रंग का. चोर वह हीरा नहीं ले जा सके.’
उसने धीमे से अपनी जेब को टटोला. जेब खाली थी, जेब में हीरा नहीं था.
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©आइ बी अरोड़ा 

2 comments:

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